33+ Quotes of Lord Mahavir : A Path to Inner Peace | भगवान महावीर
भगवान महावीरके ३३ टा अनमोल वचन | Quotes of Lord Mahavir

1. स्वंयपर विजय प्राप्त करब लाखो शत्रुपर विजय होएसँ बेसी नीक बात अछि।
Quotes of Lord Mahavir भगवान महावीर के अनमोल वचन
2. आत्मा अकेले आबैत छै आ अकेले जाइत छै, नइँ कियो ओकर साथ दैत छै आ नइँ कियो ओकर मित्र बनैत छै।
The Teachings of Lord Mahavir: A Path to Inner Peace
3. प्रत्येक जीव स्वतंत्र छै आ कियो केकरोपर र निर्भर नइँ करैत छै।
4. पर्यावरणके महत्वपूर्ण सिद्धान्त ई छियै जे अहिँटा असगरे मात्रे तत्व नइँ छियै।
5. भगवानके अलग सँ कोनो अस्तित्व नइँ छै। हरेक व्यक्ति सही दिशामे सर्वोच्च प्रयास कएलाक बाद देवत्व प्राप्त क सकैत अछि।
अहिंसापर महावीरके वचन
6. सब जीवित प्राणीक प्रति सम्मान करब अहिंसा छियै।
30 Inspiring Quotes of Lord Mahavir
7. शान्ति आ आत्मनियंत्रण अहिंसा अछि।
8. अहिंसा सबसँ बड्का धर्म अछि। \~ भगवान महावीर स्वामी
Mahavir’s Message of Compassion and Peace
9. स्वयंसँ लड़ू, बाहरी दुश्मनसँ की लड़बै? जे स्वयंपर विजय प्राप्त क लेत ओकरा आनन्दके प्राप्ति होएत।
10. स्वंयसँ नम्हर कोनो शत्रु नइँ अछि। असली शत्रु अहाँक भीतर रहैत छै, ओ शत्रु छियै क्रोध, घमण्ड, लालच, आसक्ति आ धृणा ।
आत्मज्ञान पर महावीर के विचार
11. सबसँ बडका गलती अपन असली स्वरूपसँ अजान रहब छै, आ ई केवल आत्मज्ञान प्राप्त क ठीक कएल जा सकैत अछि।
12. जिबू आ जीय दिय, केकरो दुःख नइँ दियौ । किए कि सबके जीवन हुनका लेल प्रिय छै।
13. आपातकालिन स्थितिमे मन के डगमगाए नै देबाक नइँ चाही।
14. प्रत्येक आत्मा स्वयंमे सर्वज्ञ आ आनन्दमय अछि। आनन्द बाहरसँ नइँ आबैत अछि।
Quotes of Lord Mahavir in Maithili
15. हरेक जीवित प्राणीक प्रति दया करू। घृणासँ विनाश होइत अछि।
16. क्रोध सदिखन बेसी क्रोधके जन्म दैत छै आ क्षमा आ प्रेम सदिखन बेसी क्षमा आ प्रेमके जन्म दैत छै।
17. कठिन परिस्थितियोमे हरबरेबाक नइँ चाही बल्कि धैर्य राखबाक चाही।
Lord Mahavira Maithili Quotes
18. सब मनुष्य अपन दोषके कारण दुखी होइत छै, आ अपने गलती सुधारि क प्रसन्न भ सकैत छथि। \~ भगवान महावीर स्वामी
19. एकटा व्यक्ति जरैत जंगलक बीचमे एकटा ऊँच गाछपर बैसल अछि। ओसभ जीवित प्राणीकेँ मरैत देखैत अछि। मुदा ओ ई नइँ बुझैत छै जे जल्दिये ओकरो ईहे दशा होएबला छै। ओ आदमी मूर्ख छै।
Bhagwan Mahavir Quotes in Maithili
20. जँ अहाँके खुश रहबाक अइछ तँ दूटा चीज याद राखू — भगवान आ अपन मृत्यु !
21. मात्रे ओहि व्यक्ति सही निर्णय ल सकैत छै, जे आत्मबंधन आ विरक्तिके यातनासँ संतप्त नइँ हो। \~ भगवान महावीर स्वामी
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22. जेना एकटा कछुआ अपन मुडीकेँ शरीर भीतर ल लैत छै, तहिना एकटा वीर अपन मन पापसँ हटा क अपना भितरमे लगा लैत छै।
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23. जे जागरूक नइँ छै ओकरा सब दिशासँ डर छै। जे सतर्क छै ओकरा कतौँसँ कोनो डर नइँ छै।
24. जन्मके मृत्युसँ, जवानीके बुढ़सँ आ भाग्यके दुर्भ्यग्यसँ स्वागत कएल जाइत अछि, एहि प्रकारेँ दुनियामे सब किछु क्षणिक अछि।
25. जेना कि सब जरैत आगिसँ दूर रहैत छै, तहिना पाप एकटा प्रबुद्ध व्यक्तिसँ दूर रहैत छै।
26. एकटा टुकरीयोक लेल लालच करब पापके जन्म दैत अछि। एकटा लालचरहित व्यक्ति, जँ ओ मुकुटो पहिरने छै तँ पाप नइँ क सकैत अछि।
महावीर स्वामीके प्रेरणादायक विचार
27. जतेक बेसी अहाँ पाबैत छी, ओतेक बेसी अहाँक इच्छा बढैत छै, लाभक संग-संगे लालच बढ़ैत जाइ छै। जे २ ग्राम सोनासँ पूर्ण कएल जा सकैत छै ओ दश लाखोसँ नइँ कएल जा सकै छै।
28. एकटा चोर नइँ तँ दया आ नइँ तँ शर्म महसूस करैत छै, नइँ तँ ओकरामे कोनो अनुशासन आ विश्वास होइ छै। एहन कोनो पाप नइँ छै जे ओ धनके लेल नइँ क सकैत छै।
29. वाणीक अनुशासन मतलब असत्य बोलएसँ बचब आ मौनके पालन करब ।
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30. केकरो ताबेधरि नइँ बोलबाक चाही जहियाधरि ओकरा जरुरी नइँ रहए । ओकरा दोसरके बातचीतमे व्यवधान नइँ करबाक चाही।
31. केकरो माथपर गुच्छा या जटा रहए या केश बिहिन होए, ओ नग्न साधक रहए कि वा फाटल-चिटफ कपड़ा पहिरैत होए। जँ ओ झूठ बोलैत छै तँ ई सब व्यर्थ आ निष्फल अछि।
32. एकटा सच्चा मानव ओतबे विश्वसनीय अछि जतेक माए, ओतबे आदरणीय अछि जतेक गुरु आ ओतबे परमप्रिय अछि जतेक ज्ञानी व्यक्ति।
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33. सत्यक प्रकाशसँ प्रबुद्ध भ क बुद्धिमान व्यक्ति मृत्युसँ ऊपर उठि जाइत अछि।
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34. हे स्व ! सत्यके अभ्यास करू, आ आओर किछु नइँ बस सत्यके।
भगवान महावीर [Lord Mahavir]

हुनकर जन्म 599 ईसा पूर्वमे वैशाली (वर्तमान बिहार, भारत)मे भेल छल। हुनकर पिता राजा सिद्धार्थ आ माता रानी त्रिशला (प्रियकारिणी) छलथिन। बाल्यकालमे हुनक नाम वर्धमान छल । भगवान महावीर जैन धर्मक 24म तीर्थंकर छथि। विवाहोपरांत हुनकर एक पुत्री छलनि, मुदा 30 वर्षक आयुमे हुनकर माता-पिताके देहांतक बाद गृहत्याग क संन्यास ग्रहण कएलनि।
संन्यास लेलाक बाद महावीर 12 वर्ष धरि घोर तपस्या, मौन आ ध्यान कएलनि। एहि अवधिमे हुनका अनेक कठिन परीक्षासभ सहलनि, मुदा अहिंसा, क्षमा आ संयमसँ नै डिगमगाएल । अंततः 599–587 ईसा पूर्व के मध्य, ऋजुपालिका नदी कात, साल गाछके नीचाँ कैवल्य प्राप्ति भेल।
कैवल्य प्राप्तिक बाद महावीर 30 वर्षधरि ज्ञान आ जैन धर्मक सिद्धांत — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य आ अपरिग्रह — के प्रचार कएलनि। गवान महावीरके निर्वाण (मृत्य) 527 ईसा पूर्वमे पावापुरी (वर्तमान बिहार) मे भेल छल।




