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31 Peaceful Quotes of Guru Gobind Singh | गुरु गोबिंद सिंह

गुरु गोबिन्द सिंहक अनमोल विचार

सिखसभक दशम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जीकेँ हुनकर वीरता, बलिदान आ आध्यात्मिक उपदेशसभक लेल जानल जाइत अछि। थप विवरण निचाँ… एत गुरु गोबिन्द सिंह जीक ३१ टा सर्वश्रेष्ठ आ प्रेरणादायक अनमोल विचार (Guru Gobind Singh Thoughts and Quotes in Maithili) प्रस्तुत कएल जा रहल अछि, जे जीवनमे शान्ति आनत ।

Top 31 Guru Gobind Singh Quotes in Maithili

1.

सवा लाखसँ एककेँ लड़ाएब,
चिड़ैसँ हम बाजकेँ हराएब,
तखने गुरु गोबिन्द सिंह नाम कहाएब ॥

2.

जखन अहाँ अपन भितरसँ अहंकारकेँ मेटा देब, तखने अहाँकेँ वास्तविक शान्ति प्राप्त होएत।

3.

हम ओहि लोकसभकेँ पसन्द करै छी जे सत्यके मार्गपर चलैत छथि।

4.

ईश्वर हमरासभकेँ जन्म देने छथि, जाहिसँ हमसभ संसारमे नीक काज कऽ सकी आ नकारात्मकताकेँ दूर करी।

Guru Gobind Singh Day’s Quotes

5.

मानवसँ प्रेम राखब, इएह ईश्वरके सही भक्ति अछि।

6.

नीक कर्मसँ अहाँ ईश्वरकेँ पाबि सकैत छी। नीक कर्म करएबलाके ईश्वर मद्दत करैत छथि।

7.

जे कियो हमरा भगवान कहत, ओ नरकमे चलि जाए।

8.

हमरा हुनकर सेवक मानू। आ एहिमे कोनो शंका नइँ राखू।

9.

जखन बाकी सब तरिका विफल भऽ जाए, तँ हाथमे तलबार उठाएब सही छियै।

10.

असहायपर अपन तलबार चलेबाक लेल उताहुल नइँ होउ, नइँ तँ विधाता अहाँके खून बहाएत।

Best Sayings of Guru Gobind Singh Ji in Maithili

11.

ओ सबदिन अपन अनुयायीसभकेँ आराम देने छथि आ हर समय हुनकर मद्दति कएने छथि।

12.

हे ईश्वर, हमरा आशीर्वाद दियौ जे हम कहियो नीक कर्म करएमे संकोच नइँ करी।

13.

ई मित्र संगठित छथि, आ फेर अलग नइँ हेत, हुनका स्वयं भगवान एक कएने छथि।

14.

सबसँ महान सुख आ स्थायी शान्ति तखन प्राप्त होइ छै जखन कियो अपन भीतरसँ स्वार्थकें समाप्त कऽ दैत अछि।

Guru Gobind Singh Quotes in Maithili

15. 

दिन-राति, सबदिन ईश्वरके ध्यान करू।

16.

सब कियो ओहि सत्य गुरुके जयजयकार आ प्रशंसा करथि जे अपनासभकेँ भगवानक भक्तिके खजानाधरि लऽ गेल।

17.

भगवानके नाम बाहेक कियो मित्र नइँ अछि, भगवानके विनम्र सेवक एकर चिन्तन करैत छथि आ एहिकेँ देखैत छथि।

18.

अहाँ ब्रह्माण्डके रचना केलहौँ, अहीँ सुख-दुखके दाता छी।

19.

अहीँ स्वयं छी, अहीँ स्वयं सृष्टिके सृजन कएने छी।

20.

सत्कर्मद्वारा, अहाँकेँ साँच गुरु भेटत, आ ओकर बाद भगवान भेटत, हुनकर मधुर इच्छासँ, अहाँकेँ हुनक दयाक आशीर्वाद प्राप्त होएत।

Guru Gobind Singh Thoughts and Teachings

21.

साँच गुरुके सेवा करैत स्थायी शान्ति प्राप्त होएत, जन्म आ मृत्युके कष्ट मिटि जाएत।

22.

अज्ञानी व्यक्ति पूर्ण रूपसँ आन्हर छथि, ओ मूल्यवान चीजसभके कदर नइँ करैत छथि।

Guru Gobind Singh Quotes

23. 

ईश्वर स्वयं क्षमाकर्ता छथि।

24.

बिना गुरुके ककरो भगवानके नाम नइँ भेटल अछि।

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25.

बिना नामके कोनो शान्ति नइँ अछि।

26.

मृत्युके शहरमे, ओकरा बान्हि कऽ पीटल जाइत छनि, आ कियो हुनक प्रार्थना नइँ सुनैत अछि।

27.

जे लोक भगवानक नामसँ ध्यान करैत छथि, ओसभ शान्ति आ सुख प्राप्त करैत छथि।

28.

हम ओहि गुरु लेल न्योछावर छी, जे भगवानक उपदेशसभके पाठ करैत छथि।

गुरु गोबिन्द सिंहक प्रेरणादायी विचार मैथिलीमे

29.

सेवक नानक भगवानके दास छथि, अपन कृपासँ, भगवान हुनकर सम्मान सुरक्षित राखैत छथि।

30.

स्वार्थ अशुभ संकल्पसभकेँ जन्म दैत अछि।

31.

जँ अहाँ भविष्यक बारेमे मात्रे सोचैत रहबै, तँ वर्तमानकेँ सेहो गुमा देब।

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हुनक बेटासभक योगदन : 
सिखसभक १०म गुरु गोबिंद सिंहक चारू बेटासभ (साहिबजादासभ) धर्म आ देशक रक्षाक लेल जे शहादत देलनि, ओकरा आइधरि गाैरवसँ याद कएल जाइत अछि।

गुरु गोबिंद सिंहके सबसँ कम उमेरमे साहिबजादासभ ९ वर्षक बाबा जोरावर सिंह आ ७ वर्षक बाबा फतेह सिंहक बलिदान दिवस मनाओल जाइत अछि। मुग़लसभ दुनू छोट साहिबजादासभपर धर्म परिवर्तन करबाक आ इस्लाम धर्म अपनेबाक लेल भारी दबाव देने छल, मुदा दुनू गोटे अपन सिख धर्ममे अटल छलथि।

एहिक्रममे गुरु गोबिंद सिंहक दुनू पुत्र— साहिबजादा अजीत सिंह (१८ वर्ष) आ साहिबजादा जुझार सिंह (१४ वर्ष)— २२ दिसम्बर १७०४ के चमकौरके ऐतिहासिक युद्धमे मुग़ल सेनासँ बहादुरीसँ लड़ैत शहीद भेल छलाह।

मुग़ल बादशाह औरंगजेबके आदेशसँ सरहिंदके नवाब वजीर खान गुरु गोबिंद सिंहके छोट बेटासभ बाबा जोरावर सिंह आ बाबा फतेह सिंहकें जिंदे देबालमे टाइङ देने छल। ई हृदयविदारक घटना दिसम्बर १७०४ ईस्वीमे भेल छल ।  २६ दिसम्बरकें ‘वीर बाल दिवस’ क रूपमे मनाओल जाइत अछि। एकरा इतिहासक सबसँ वीभत्स घटनासभमेसँ एक मानल जाइत अछि।

भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी ९ जनवरी २०२२ केँ प्रतिवर्ष २६ दिसम्बर कें ‘वीर बाल दिवस’ मनेबाक घोषणा कएने छलाह।

“वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह”

Guru Gobind Singh

गुरु गोबिंद सिंह जी सिखसभक दशम आ अन्तिम गुरु छलाह। हुनक जन्म २२ दिसम्बर १६६६ के बिहारक पटना साहिबमे भेल छल। अपन पिता गुरु तेग बहादुरके मृत्युके बाद मात्र नौ सालक अल्पायुमे ओ गुरुक गद्दी पर बैसल छलाह। ओ सिख साहित्यमे अपार योगदान देलनि आ अपन जीवनक अन्तिम समयमे 'गुरु ग्रंथ साहिब' केँ सिखसभक शाश्वत आ अन्तिम गुरु घोषित कऽ मानव गुरुक परम्पराकेँ समाप्त केलनि। हुनकसभसँ महत्त्वपूर्ण योगदान १६९९ ई. क बैसाखीक दिन 'खालसा पंथ' के स्थापना छल, जे सिख समाजकेँ 'संत-सिपाही' क रूपमे संगठित केलक। ओ खालसाक लेल 'पञ्च ककार' (केश, कंघा, कड़ा, कचेरा आ कृपाण) धारण केनाइ अनिवार्य केलनि। गुरु गोबिंद सिंह जी मुग़ल साम्राज्यक अत्याचार आ अन्यायसँ लड़ैत अपन सम्पूर्ण जीवन व्यतीत केलनि। धर्म, सत्य आ मानवताक रक्षार्थ ओ अपन चारि पुत्र (चार साहिबजादे) सहित पूरा परिवारकें बलिदान कऽ देलनि, जाहि कारणेँ आदरसँ 'सरबंस दानी' सेहो कहल जाइत अछि।

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