Hazrat Muhammad islamic Quotes । हजरत मोहम्मद प्रेरक विचार

पैग़म्बर हजरत मोहम्म अरबके शहर मक्कामे जन्मल छल। एक भविष्यवक्ता तथा ईश्वरके संदेशवाहक छलाह।





1: सबसँ नीक लोक उ छै, जकरासँ मानवताके भलाइ होइ छै।



2: मजदूरकेँ मजदुरी ओकर पसिना सुखयसँ पहिने देल जेबाक चाही।



3: कोइ पैगंबर साहबसँ कहलनि, ” मूर्तिपूजसभ”के नाश हेतु अल्लाहसँ दुआ करु 
आ हुनका श्राप देलजाए। ” पैगंबर (स अ व) जवाब देलनि ” 
हम एत रहम करबाक लेल पठाएल गेल छी। न कि श्राप देबाक लेल।



4: एकाधिकार राखयवला पापी आओर अन्यायी अछि।



5: जे क्यो अपन तामसकेँ दवाबै छै, 
हुनका प्रकट करबा क्षमता रहितो धैर्य राखै छै।
 तँ अल्लाह हुनका बहुत बडका इनाम देथिन।



6: जे क्यो निराश व्यक्तिकेँ सांत्वना देत, हुनका ओहने पुरस्कार देल जाएत।



7: ओ अपन नइँ छियै जे बच्चासभ प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार नइँ करै छथि, 
जेष्ठके प्रतिष्ठाकेँ सम्मान नइँ करै छै।



8: अल्लाहके सब प्राणी हुनकर परिवार अछि, 
आओर अल्लाह हुनका सबसँ बेसी चाहै छै,
जे हुनक प्राणीसभकेँ बेसीसँ बेसी भलाइ करै छथि।



9: लोकसभसँ नम्रतासँ व्यवहार करू आओर कठोर नइँ बनु, 
हुनको खुश करू आओर हुनकर तिरस्कार नइँ करू ।



10: कोनो व्यक्तिके दान वा भेंट देनाइ आ ओकरा फिर्ता लेनाइ वैध् नइँ अछि।
 ई तँ अभिभावकके लेल मात्रे सम्भव भ सकै छै, जे अपन बच्चाके किछ देने होइ ।



11: जे ई चाहै छै की अल्लाह हुनका क़यामतके दिन ग़म आ आफतसँ बचाबथि,
 हुनका अपन गरीब क़राज्दारसभ लग कर्ज माङ्गैमे देरी करबाक चाही
 वा हुनकर कुछ या पूरा कर्ज माफ करि देबाक चाही।



12: जिनका लग एक दिन आ एक रातियो टाके भोजन छै
 तँ हुनका लेल भीख माँगनाइ वर्जित छै।



13: पाखण्डीके तीन पहचान अछि, 
भलेही रोज़ा राखय, नमाज़ पढय आओर सोचय की उ मुसलमान छै
 — जखन झूठ बाजय छै, जखन बचनवद्ध होइछै तँ पाछु हटि जाइ छै
 आओर जखन.. ओकरा पर अमानत छोरल जाइ छै तँ ओकरा चोराए लै छै



14: अल्लाहके दृष्ट्रीमे उ व्यक्ति सर्वाधिक प्रिय आओर 
कयामतके दिन हुनकर सिन्हासनके सर्वाधिक निकट हेतै।
 जे एगो न्यायी नेता हेतै, तहिना अल्लाहके दृष्ट्रीमे सबसँ तुच्छ आ
 सबसँ दूर एगो अत्याचारी नेता हेतै।



15: जिनकर क्रियाकलाप हुनक परिवारके द्वारा बहुत पसंद कएल जाए 
ओएह सबसँ सच्चा मुसलमान अछि।



16: भूखलकेँ भोजन देल जाउ, बीमारके देखभाल कएल जाउ
 आ जँ कोइ अनुचित रूपसँ बन्दी बनाएल गेल छै तँ ओकरा मुक्त करू।



17: जे एगो अल्लाहके न्याय चक्रपर विश्वास छै ,
हुनका अपन पड़ोसियाकेँ हानी नइँ करबा चाही।



18: जे एगो अल्लाहके न्याय चक्रपर विश्वास छै , 
हुनका मधुर बोलबाक चाही या फेर चुप रहबाक चाही।



19: सबसँ पवित्र मुसलमान घर उ छै जतँ अनाथकेँ पलान होइ छै
 तथा सबसँ अपवित्र मुसलमान घर उ छै जतँ अनाथके साथ दुर्वव्यवहार कएल जाइ छै।



20: उ आदमी स्वर्गमे प्रवेश  पाबि सकै छै 
जकर दिलमे घमण्डके एको कण नइँ रहतै ।



21.. अहाँ धरतीवलासभ पर दया करू, 
आकाशवला (अल्लाह ) अहाँ पर दया करथिन।



22. अल्लाहके हुक्मके अनुसार खर्च करिके स्वंयकेँ नरक अग्निसँ बचाबु। 
अहाँके सम्पतिमे अहाँके नातेदारसभ, गरीबसभ, अनाथसभके सेहो हक छै। 
ओकर हक अदा करू।



23. दिखावटीके काम नइँ करू ।
 दान नुकाक देल जाउ । उपकार करिक बिसैर जाउ।



24. जे क्यो गलतकेँ देखबै, तँ अपन शक्ति अनुसार ओकरा रोकबाक प्रयास करू। 
जँ रोकबाक क्षमता नइँ होइ तँ दिलसँ ओकरा खराब बुझु।



25. सब कर्मके आधार नीयत छै।
 गलत नियतसँ कएल पुण्य कर्मके सेहो नीक फल अल्लाह नइँ देत।



26. अपन भाइके मदद करू, चाहे उ अत्याचारी होइ या अत्याचारसँ पिडित होइ ।
 पिडितके मदद ई छै जे अत्याचारीसँ ओकरा छोडाबल जाए 
आओर अत्याचारीके मदद ई छै जे ओकरा अत्याचारसँ रोकल जाए।



27. अपन कोनो भाइकेँ मुश्किलमे देखक खुश नइँ होउ,
 सम्भव छै अल्लाह ओकरा मुश्किलसँ निकालिक अहीकेँ मुश्किल द दै ।



28. अपन मुसलमान भाइसँ मिलैत काल तोहर मुस्किया देनाइ सेहो दान अछि। 
सँच बात कहनाइ आ बैमानीसँ रोकनाइ, 
भटलके सही रास्ता देखाइ सेहो इश्वरके प्रति दाने अछि।



29. जतँ धरि भ सकए प्रत्येकसँ इमानदारी देखाबु चाहे उ नीक रहए या खराब ।



30. जे ज्ञान रस्ता अपनेलक उ स्वर्गके रस्ता अपनेलक।



31. ईमान आ कन्जूसी एके जगह नइँ रहि सकै छै।



32. सरलता ईमानदार चरित्रके लक्षण अछि ।



33. खराब आ झुठ बातसभसँ छुप रहनाइये बहुत बडका बुद्धियारी अछि।



34. प्रत्येक नशाबला वस्तु हराम छी।



35. लोकके झुठ बनैलेल ई प्रयाप्त छै जे सुनल सुनाएल बातकेँ बिना
 अनुसन्धान कएनेही आगु अपन बयान करि देनाइ ।



36. जे मृत्युकेँ याद राखिक आओर ओकर नीकसँ
 तयारी करए तँ उ सभसँ बेसी बुद्धियार अछि।


37. ठोकरके बिना क्यो धैर्यवान नइँ बनि जाइ छै, 
अनुभवके बिना क्यो होशियार नइँ बनि जाइ छै।



38. जे दया नइँ करतै ओकरा पर विल्कुल दया नइँ कएल जेतै।



39. स्वर्ग माएके टाङ्ग तरमे अछि।



40. नीच व्यक्ति उ छै जेकरा लोक डरसँ ओकर इज्जत करए।



41.जे अपन सनेश या दानकेँ फिर्ता ल लै छै से एहन कूत्ताके समान छै 
जे अपने उगललके फेरसँ खाइ छै।



42. आफतमे रहल प्रत्येक व्यक्तिके सहायता करबाक चाही
 भलेही ओ मुस्लिम होइ या गैर मुस्लिम ।



43. जखन अहाँकेँ नेकी करिक खुशी आ पाप करिक पश्चताप होइ
 तँ अहाँ मोमिन (आस्तिक) छियै।



44. भोजन खुवेनाइ आओर अन्जानकेँ सलाम कएना उत्कृष्ट इस्लामके (अमल) पालन छियै ।



45.. दुनिया एहन खेती छियै सुरूमे जेहे रोपबै अन्तमे ओएह काटबै।



46. दुखी व्यक्तिके आहसँ डर किए कि ओकर आओर अल्लाहके बीच कोनो पर्दा नइँ छै।



47. जे धोका दै उ इंसानमेसँ नइँ अछि।



48.. मुसलमानकेँ गारि पढनाइ पाप छै 
आओर ओकरासँ युद्ध कएनाइ कुफ़।



49.एक दोसरकेँ खुशामद नइँ करू किए 
कि ई एना भेलै जे केकरो वध (हलाक) कएनाइ।


50. शक्तिशाली उ नइँ जे दोसरकेँ पाछरि दै, 
शक्तिशाली उ छथि जे तामसमे स्वंयपर नियन्त्रण राखय।



51.अल्लाह अत्याचारीकेँ फुरसत देने रहै छै 
लेकिन जखन पकड़ै छै तँ फेर नइँ छोड़ै छै ।



# अश्लीलता आ निर्लज्जताके लगो नइँ जाउ, 
चाहे उ खुला होइ या नुकाएल ।



# महिला, दास आ अनाथ पर विशेष रूपसँ दया करू।

# भगवान 

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