आचार्य चाणक्य प्रेरणादायी अनमोल विचार

आचार्य चाणक्यके 71 विचार मैथिलीमे

Born: 375 BC, Taxila, Pakistan
Died: 283 BC, Pataliputra

1. भगवान सबकेँ एके  माटिसँ बनाबै छै,

बस्स फरक एबे छै कि, कियो बहारसँ सुन्दर रहै छै

तँ कियो भीतरसँ 




2. दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्तिके शरीरकेँ सेहो निर्बल बनाए दै छै ।



3. प्रेम पीपरके बीया अछि ,जत सम्भावना नइँ ,

ओतहु जन्मि जाइ छै। 



4. अहाँ किछो चुनैए लेल स्वतन्त्र छियै,

लेकिन जे अहाँ चुनै छियै, ओकर परिणामसँ कहियो स्वतन्त्र नइँ छियै


 

 5.कोन उमेर धरि पढ़ैके चाही, आओर कोन उमेरसँ कमाएल जाए,

ई शौख नइँ बल्कि हालात तय करै छै ।


 

6.राति भरि  गहीर निन एनाइ एते आसान नइँ छै,

तइके लेल  दिन भरि इमानदारीसँ जिय परैत छै।


 

 7.भाग्य हुनकर साथ दै छै, जे हरेक संकटके सामना करियोके

अपन लक्ष्य प्रति दृढ रहै छै।



 

8.असंभव शब्दके प्रयोग तँ मात्र कमजोर करै छै,

बुद्धिमानी ज्ञानी व्यक्ति अपन रस्ता अपने बनबै छै ।




9. जे अपन निश्चित कर्मकेँ त्याग करिके, आओर अनिश्चितके चिंता करै छै,

ओकर अनिश्चित लक्ष्य तँ खतम हेबे करै छै, साथमे निश्चित सेहो खतम भ’ जाइ छै।


मातृदिवसके महत्व आ प्रसिद्ध विचार


 10. पन्छी कहियो अपन बच्चाकेँ भविष्यके लेल खोता बनाएके नइँ  देै छै,

उ तँ बस्स ओकरा उड़ैके कला सिखा दै छै।

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11. ओकरासँ सलाह कहियो नइँ लिय जे ओइ अवस्थाकेँ नै भाेगने छै,



आचार्य चाणक्य मैथिली अनमोल विचार

 

 12. जे तु मागै छी , ओकरा मिलते, ओकर मूल्य कम भ जाइ छै

 आओर  फेरसँ  किछ मांगैके इच्छा भ’ जाइ छै ।



13. माङ्गैसँ नीक, ओइ खजानाके खोजु जे

अहाँके भितर नुकाएल अछि। 


 


 14.समस्याके समाधाान अइ बातपर निर्भर करै छै,

कि अहाँके सल्लाहकार के छथि ? ई बहुत महत्वपूर्ण छियै

किए कि दुर्योधन शकुनीसँ सलाह लेै छलै, आओर   अर्जुन श्रीकृष्णसँ।


 


15. मन बहुत चमत्कारी शब्द छै,एकर आगु ‘न’ लगेलासँ ई  नमन भ जाइ छै

 आओर एकर पाछु ‘न’ लगेलासँ ई मनन भ जाइ छै,

अइ लेल जीवनमे नमन आओर  मनन करिते रहु,

जीवन सफले नइँ  बल्कि सार्थक सेहो भ जाएत।


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16. शान्त होइके कोनो जोगार नइँ होइ छै,

मात्र अशान्त होइके जोगार होइ छै,

जँ अशान्त होइके कारण समझमे आबि जाए

तँ व्यक्ति शान्त भ जाइ छै ।


आचार्य चाणक्य अनमोल विचार 


 17. मेहनत चुट्टीसँ सिखु, तरिका बगुलासँ,

आ मखरासँ कारीगरी, आओर अपन विकासके लेल

 अन्तिम समय धरि संघर्ष करू किएकि संघर्षे जीवन छियै।




18. आँखिमे पड़ल खर,टाङगमे गरल काँट,

 आओर रुइयाँमे नुकाएल आगिसँ सेहो  भयानक छै,

हृदयमे नुकाएल कपट । 


 


19.आवश्यकतासँ बेसी ईर्ष्या,

अहाँके भितर आत्मविश्वासके कमीके देखाबैत अछि।


 

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20.जीवनके लेखक बन, आओर अपन मनके पाठक,

किएकि जतेक बेसी अपन बारेमे ज्ञान अर्जित करियोक,

ओतबे  कम तोरा दोसरके सलाह पर निर्भर रह परताै।


 


21. जे बीत गेल से बीत गेल,

जँ अपनासँ कोनो गलत काम भ गेल छै

त ओकर चिन्ता करैसँ बढियाँ वर्तमानकेँ

सुधारिक भविष्यकेँ देखबाक चाही।




22.सबसँ बडका गुरू मन्त्र: अपन रहस्य केकरो नइँ बताउ

ई  अहाँके समाप्त क’ देत




23. जइ काममे निपुण छियै

वएह काममे करू ।



24.हे बुद्धिमान लोकसभ,अपना सम्पति ओेकरे दियाै जे योग्य छै आओर केकरो नइँ ,

 बादलमे जम्मा भेल समुन्द्रके पानि हमेशा मीठ रहै छै। 


 


25.बुद्धिसँ पैसा कमाएल जाइ सकै छै ,

लेकिन पैसासँ बुद्धि नइँ ।


 


26. संकटमे बुद्धि सेहो काम नइँ  आबै छै ।


 


27 .झुकनाइ बहुत नीक बात छियै, नम्रताके  पहिचान होइ छै,

लेकिन आत्मसम्मानकेँ मारिके झुकनाइ स्वंयम् केँ मारि देना जँका अछि। -




28. फूलके गमक हवाके दिशामे मात्र पसरै छै

मुदा एगो व्यक्तिके नीक काम चारू दिशामे पसरै छै।


 


29.कोनो व्यक्ति अपन कामसँ महान होइ छै,

अपन जन्मसँ नइँ ।


 


30. सम्पति,दोस्त, पत्नी फेरसँ प्राप्त कएल जा सकै छै,

मुदा ई शरीर फेर प्राप्त नइँ कएल जा सकै छै।


 

आचार्य चाणक्य अनमोल विचार 

31. एक सन्तुलित मनके बराबर कोनो तपस्या नइँ, सन्तोषके बराबर कोनो खुशी नइँ,

 लोभके जेना कोनो बेमारी नइँ , दयाके जकाँ कोनो सदाचार नइँ ।


 


32. उ जे अपन परिवारसँ अति लगाब राखै छै,

भय आओर दुखमे जिबै छै।

सब दुखके मुख्य कारणे लगाब अछि ,

अइ दुवारे खुश रहबाक लेल लगाबके मनसँ त्याग आवशयक छै।


 


33. जत आदर ओत जाएब नइँ ,जे सुनै नइँ ओकरा समझाएब नइँ

जे पचै नइँ  ओकरा खाएब नइँ जे सत्यपर रूसि जाइ ओकरा मनाएब नइँ



 


34.आगिमे आगि नइँ देबाक चाही,

मतलब, क्रोधी व्यक्तिकेँ अधिक क्रोध नइँ  दिएबाक चाही।


 


35. प्रत्येक मित्रताके पाछु कोनो न कोनो स्वार्थ रहै छै,

एहन कोनो मित्रता नइँ  जाहिमे स्वार्थ नइँ होइ,


 

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36.जिन्गी आओर  चुनौती सबके हिस्सामे नइँ आबैछै,

 किएकी भाग्य सेहो भाग्यशालीकेँ  आजमाबै छै ।


 

37. कोनो काम सुरू करबासँ पहिने, अपनासँ तीन प्रश्न करू –
 हम ई किए करि रहल छियै ?, एकर परिणाम कि भ’ सकै छै ? 
 आओर कि हम सफल हएबै ?
आओर जब गहराइसँ सोचला पर अइ प्रश्नसभके संतोषजनक उत्तर मिल जाए, 
तखने आगु बढू ।

 

38. व्यक्ति असगरे जन्मै छै आओर असगरे मरि जाइ छै ; आओर उ अपन नीक आओर खराब कर्मसभके फल अपने भोगै छै ; आओर उ असगरे नर्क वा स्वर्ग जाइ छै ।

 

39. भगवान मूर्तियसभमे नइँ छै । अहाँके अनुभूति अहाँके इश्वर अछि । आत्मा अहाँके मंदिर अछि

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40. जँ सांप विखाह नहियो छै तइयो ओकरा विखाह छियै से  देखेबाक चाही ।


41. अइ बातकेँ व्यक्त नइँ हुअ दियाै जे अहाँ कि करैलेल सोचने छियै। बुद्धिमानीसँ  एकरा रहस्य बनाएक राखु आओर अइ कामकेँ करबाक लेल दृढ रहू ।


42. शिक्षा सबसँ सच्चा मित्र छियै । एगो शिक्षित व्यक्ति प्रत्येक जगह सम्मान पाबै छै । शिक्षा सौंदर्य आओर यौवनकेँ परास्त करि दैत छै ।


43. जखनि डर अहाँके लग आबै, ओकरा पर आक्रमण करि ओकरा नाश करू।


44. कोनो मूर्ख व्यक्तिक लेले किताब ओतबे उपयोगी छै, जतबे कि एगो आन्हर व्यक्तिके लेले ऐना।


45. जखनधरि अहाँके शरीर स्वस्थ आओर नियंत्रणमे अछि आओर मृत्यु दूर अछि , अपन आत्माकेँ बचेबाक  कोशिस कएल जाओ; जखन मृत्यु कपार पर आबि जाएत तब अहाँ कि करि सकबै ?


46. कोनो व्यक्ति अपन कामसँ  महान होइ छै , अपन जन्मसँ  नइँ ।

47. साप, नृप, शेर, डंक मारैबला ततैया, छोटका बच्चा, दोसरके कुत्ता, आओर एगो मूर्ख: अइ सातुके नीनसँ  नइँ उठेबाक चाही ।

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48. जेना एगो सुखल गाछीके जँ आगि लगा देल जाए तँ उ पूरा जङ्गल जरा दै छै , ओहिना एगो पापी पुत्र पुरे परिवारकेँ बर्वाद करि दै छै ।


49. पहिने पाँच सालमे अपन बच्चाकेँ बहुत प्यारसँ  राखु। आगु पाँच साल ओकरा डांट-डपटिके राखू। जखनि सोलह सालके भ जाए तँ एक मित्र जँका व्यवहार करू। अहाँके वयस्क बच्चे अहाँके सबसँ नीक मित्र अछि।


50. दुनियाक सबसँ बड़का शक्ति जवानी आओर स्त्रीके सुन्दरतामे अछि ।

 

51. अपनासभकेँ बितलके बारेमे पछतेनाइ नइँ चाही,नहिये भविष्यके बारेमे चिंतित हेबाक चाही; विवेकवान व्यक्ति सदैव वर्तमानमे जीबै छै ।

52. प्रत्येक मित्रताके पाछु कोनो न कोनो स्वार्थ रहै छै । एहन कोनो मित्रता नइँ जइमे स्वार्थ नइँ । ई तीत यथार्थ छी ।

53. वेश्यासभ निर्धनके साथ नइँ रहै छै, नागरिक कमजोर संगठनके समर्थन नइँ करै छै, आओर पंक्षी ओइ गाछमे खोता नइँ बनाबै छै जइपर फल नइँ छै।

 



54. साँपके फन, माछीके मुख आओर बिच्छुवाके डंकमे विष होइ छै ;
लेकिन दुष्टमे व्यक्ति एहुसँ बेसी भरल रहै छै ।

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55. उ जे अपन परिवारसँ अत्यधिक जुड़ल छै , 
ओकरा डर आओर चिंताके सामना कर’ पड़ै छै ,
किएकी सब दुखके जड़ि लगाव छियै। 
अइ लेल खुश रहबाक लेल लगावकेँ छोड़ि देबाक चाही।



56. ओ जे हमरासभके चिंतनमे रहता छै वएह लगमे छै ,
 भलेही वास्तविकतामे ओ बहुत दूरे किए न रहए;
 लेकिन जे अपन ह्रदयमे नइँ छै ओ लग रहियोक बहुत दूर रहै छै ।

57. अपमानित भ’ क’ जीयैसँ नीक छै मरनाइ ।
 मृत्यु तँ बस्स एक क्षणके दुःख देै छै , 
मुदा अपमान सब दिन जीवनमे दुःख आनै छै ।

58. कहियो ओकरासँ मित्रता नइँ करू जे अहाँसँ कम वा बेसी प्रतिष्ठाके अछि। एहन मित्रता कहियो अहाँकेँ  खुशी नइँ देत।

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59. सब डरसँ बेसी बदनामीके डर सबसँ बड़का होइ छै| 

60. सेवककेँ तखनि जाँचू जखनि उ काम नइँ करि रहल होइ, रिश्तेदारकेँ कोनो कठिनाइमे, मित्रकेँ संकटमे, आओर पत्नीकेँ घोर विपत्तिमे।

61. संतुलित दिमाग सन कोनो सादगी नइँ छै , संतोष सन कोनो सुख नइँ छै , लोभ सन कोनो बेमारी नइँ छै , आओर दया सन कोनो पुण्य नइँ छै ।

62. जँ ककरो स्वभाव बढिया छै तँ ओकरा कोनो आओर गुण के कि आवश्यकता छै ? जँ आदमीके सङ्ग प्रसिद्धि छै तँ ओकरा  आओर कोनो श्रृंगारके कि आवश्यकता छै ।

63.पृथ्वी सत्यके शक्तिद्वारा समर्थित अछि ; ई सत्यके शक्तिए छै जे सुरूजकेँ इजोत आओर हावाकेँ वेग दै छै ; वास्तविकता कही तँ सभी चीज सत्य पर निर्भर करै छै ।

चाणक्यके अनमोल वचन 

64. उ जकर ज्ञान मात्रे किताब धरि सीमित छै आओर जकर धन दूसरके कब्ज़ामे छै , उ ज़रुरी पड़ला पर नइँ अपन ज्ञान प्रयोग करि सकै छै नइँ तँ धन।

65. जे सुख-शान्ति व्यक्तिकेँ आध्यात्मिक शान्तिके अमृतसँ  संतुष्ट  भेलापर मिलै छै, से लालची लोककेँ बेचैनीसँ  एन-ओन भटकैसँ कहियो नइँ मिलै छै।

66. एगो अनपढ़ व्यक्तिकेँ जीवन ओहिने तरहसँ बेकार छै जेना कि कुत्ताके पुच्छरि, जे नइँ ओकर पाछुके भाग झापै छै नइँ तँ ओकरा मच्छरके भागबैसँ  बचाबै छै ।

चाणक्यके कड़वा वचन

67. एगो उत्कृष्ट बात जे शेरसँ सीखल जा सकै छै
 उ ई छै कि व्यक्ति जे किछो करै लेल चाहै छै 
ओकरा पूरा दिलसँ आओर ज़ोरदार प्रयासके साथ करू।


68. सारसके जँका एगो बुद्धिमान व्यक्तिके अपन इन्द्रिय पर नियन्त्रण रखबाक चाहि
 आओर अपन उद्देश्यकेँ स्थानक जानकारी, 
समय आओर योग्यताके अनुसार देबाक चाही।


69. जो लोक परमात्मा तक पहुँच चाहै छै,
 हुनका वाणी, मन, इन्द्रियसभके पवित्रता
 आओर एगो दयालु ह्रदयके आवश्यकता परै छै ।



70. मुर्ख व्यक्तिकेँ अपन दोष नइँ देखाए दै छै,
 ओकरा अनकरे दोष देखाबै छै।

71. जखनि अहाँ कोनो कामके सुरु करेै छियै,
 तँ असफलतासँ नइँ डरू आओर कामकेँ नइँ छोरू। 
जे लोक ईमानदारीसँ काम करै छै, उ सबसँ प्रसन्न रहै छै ।

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